✦ त्वरित जानकारी: दिवाली लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय एवं मूल नियम
दीपावली (कार्तिक अमावस्या) पर महालक्ष्मी, श्रीगणेश और कुबेर जी की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के उपरांत 2 घंटे 24 मिनट) तथा स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में करना सर्वाधिक फलदायी होता है। स्थिर लग्न में पूजन करने से मां लक्ष्मी का घर में स्थाई वास होता है।
अति महत्वपूर्ण नियम: मां लक्ष्मी को कभी भी सफेद चंदन या तुलसी दल अर्पित न करें। गणेश जी को दूर्वा तथा लक्ष्मी जी को लाल कमल का पुष्प और कमलगट्टे की माला अति प्रिय है।
दीपावली सनातन धर्म का सर्वाधिक दीप्तिमान महापर्व है। इस पावन निशा पर समुद्र मंथन से प्रकट हुईं ऐश्वर्य, सौभाग्य और मोक्षदायिनी मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। शास्त्रसम्मत षोडशोपचार विधि से चौकी स्थापना, कलश पूजन और महाआरती करने से वर्षभर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
दीपावली पूजन की आवश्यक सामग्री सूची (Checklist)
- मूर्तियां व वस्त्र: मिट्टी या धातु के गणेश-लक्ष्मी जी, चौकी के लिए लाल/पीला नया सूती या रेशमी वस्त्र, कलावा (मौली), जनेऊ।
- कलश सामग्री: तांबे/पीतल का कलश, आम्रपल्लव (5 या 7 पत्ते), पानी वाला नारियल, गंगाजल, दूर्वा, हल्दी की गांठ, सुपारी, अक्षत।
- पुष्प व पत्र: लाल कमल के फूल, गेंदे के पुष्पों की माला, दूर्वा (गणेश जी हेतु), बेलपत्र, कमलगट्टे।
- नैवेद्य व भोग: शुद्ध घी का हलवा या खीर, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), बताशे, खील, फल (अनार व सिंघाड़ा विशेष प्रिय)।
- दीपक: एक बड़ा चौमुखा दीपक (सरसों तेल या तिल तेल), छोटे मिट्टी के दीपक (21 या 31), कपूर, धूपबत्ती, रोली, चंदन, अष्टगंध।
स्थानीय सूर्यास्त पर आधारित सटीक प्रदोष काल, चौघड़िया एवं निशीथ काल मुहूर्त पूजा पंचांग पर तुरंत जांचें।
चरणबद्ध लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि
- चौकी स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी बिछाएं। उस पर लाल कपड़ा बिछाकर अक्षत की ढेरी पर गणेश जी को बाईं ओर तथा लक्ष्मी जी को दाईं ओर स्थापित करें।
- कलश स्थापना: चौकी के सामने तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का और दूर्वा डालें। मुख पर आम के पत्ते और जटा वाला नारियल लाल वस्त्र में लपेटकर रखें।
- दीप प्रज्ज्वलन: सबसे पहले एक बड़ा चौमुखा दीपक जलाकर चौकी के दाईं ओर रखें। यह अखंड ज्योति पूजा समाप्ति तक जलती रहनी चाहिए।
- गणेश पूजन: “ॐ गं गणपतये नमः” बोलते हुए दूर्वा, जनेऊ, मोदक और लाल सिंदूर अर्पित करें।
- महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजन: मां को रोली, अक्षत, इत्र, कमलगट्टे, और लाल कमल अर्पित करें। श्री सूक्तम का पाठ करें अथवा लक्ष्मी गायत्री मंत्र का 108 बार जप करें।
- बही-खाता व तिजोरी पूजन: व्यापारी बंधु अपने बही-खातों, कलम और तिजोरी पर रोली से ‘श्री’ व ‘स्वास्तिक’ बनाकर कुबेर देव का ध्यान करें।
- आरती व क्षमा प्रार्थना: पहले गणेश जी की आरती, फिर “ॐ जय लक्ष्मी माता” की आरती गाएं। अंत में अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या लक्ष्मी जी की पूजा में तुलसी चढ़ाई जा सकती है?
कदापि नहीं। तुलसी भगवान विष्णु की पटरानी हैं। शास्त्रों में भगवान विष्णु के अतिरिक्त किसी भी देवी-देवता को तुलसी चढ़ाना वर्जित है, विशेष रूप से गणेश जी और लक्ष्मी जी को।
प्रश्न 2: घर में कितने दीये जलाने चाहिए?
दीपावली की रात मुख्य पूजा में कम से कम 21 या 31 दीये प्रज्ज्वलित करने चाहिए। पहला दीया पूजा स्थल पर, दूसरा मुख्य द्वार की देहरी पर, तीसरा तुलसी के पास और चौथा जल स्रोत (रसोई) में रखना अनिवार्य है।