सनातन धर्म में कार्तिक मास को सभी बारह मासों में सबसे पावन और फलदायी माना गया है। यह मास भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना का महापर्व है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार कार्तिक मास सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को प्रारंभ होकर मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) के दिन संपन्न होगा।
उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त मास: 26 अक्टूबर 2026 से 24 नवंबर 2026 तक।
दक्षिण भारतीय अमान्त मास (आंध्र/तेलंगाना/महाराष्ट्र): 10 नवंबर 2026 से 8 दिसंबर 2026 तक।
कार्तिक सोमवार व्रत (पूर्णिमान्त): 26 अक्टूबर, 2 नवंबर, 9 नवंबर, 16 नवंबर, और 23 नवंबर 2026 (कुल 5 सोमवार)।
देवउठनी एकादशी / तुलसी विवाह: 20-21 नवंबर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली): 24 नवंबर 2026।
पूर्णिमान्त और अमान्त कैलेंडर का भेद
कार्तिक मास की तिथियों को लेकर अक्सर श्रद्धालुओं में संशय रहता है। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली) में महीने की गणना पूर्णिमा के अगले दिन से होती है (पूर्णिमान्त)। इसलिए यहां अश्विन पूर्णिमा के बाद 26 अक्टूबर 2026 से कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा आरंभ हो जाती है।
वहीं दक्षिण भारत और गुजरात में गणना अमावस्या के अगले दिन से होती है (अमान्त)। वहां दीपावली अमावस्या के बाद 10 नवंबर 2026 से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा आरंभ होती है। दोनों परंपराएं शास्त्रसम्मत हैं, श्रद्धालु अपने पारिवारिक और क्षेत्रीय संप्रदाय के अनुसार तिथियों का पालन करें।
कार्तिक मास के प्रमुख दैनिक नियम
1. ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान
कार्तिक मास में सूर्योदय से पूर्व तारों की छाया में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी का तट उपलब्ध न हो, तो घर में ही साधारण जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
2. दीपदान का विशेष महत्व
कार्तिक मास को ‘दीपदान मास’ भी कहा जाता है। प्रतिदिन संध्या के समय तुलसी चौरा, देवालय, घर की दहलीज और नदी तट पर तिल के तेल अथवा गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन 365 बत्ती का दीपक जलाना संपूर्ण वर्ष के दीपदान का पुण्यफल प्रदान करने वाला माना गया है।
3. तुलसी पूजन एवं परिक्रमा
प्रातः स्नान के उपरांत तुलसी जी को जल अर्पित करें, रोली-चंदन लगाएं और संध्या समय घी का दीपक रखें। प्रतिदिन तुलसी जी की कम से कम चार परिक्रमा करना कल्याणकारी माना गया है।
कार्तिक मास में खान-पान और जीवनशैली के नियम
- तामसिक आहार का त्याग: पूरे माह प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और बासी भोजन का पूर्ण निषेध रखें।
- दालों में संयम: पारंपरिक रूप से कार्तिक मास में बैंगन, मसूर की दाल, हींग और तेल में तले भारी भोजन का त्याग किया जाता है।
- भूमि शयन एवं सात्विकता: संभव हो तो सात्विक दिनचर्या अपनाएं, असत्य भाषण और क्रोध से दूर रहें।
कार्तिक सोमवार व्रत विधि
कार्तिक मास के सोमवार को भगवान शिव का पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शर्करा) और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग पर बिल्वपत्र और धतूरा अर्पित करें। दिनभर फलाहार या जलाहार व्रत रखें और संध्या समय प्रदोष काल में शिव पूजन और आकाश में तारों के दर्शन के बाद सात्विक एकान्न (एक समय का भोजन) ग्रहण करें।
तिथि, मुहूर्त और दैनिक पंचांग के सटीक समय के लिए हमारा दैनिक पंचांग देखें।