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विवाह मुहूर्त (Vivaha Sanskar)

वैदिक विवाह संस्कार हेतु शास्त्रोक्त शुभ मुहूर्त एवं लग्न विचार।

विवाह मुहूर्त (Vivaha Sanskar) क्या है?

षोडश संस्कारों में विवाह संस्कार गृहस्थ धर्म का आधार है। यह दो आत्माओं और दो कुलों का पवित्र मिलन है। शुभ मुहूर्त में विवाह करने से दांपत्य जीवन में सुख, शांति, वंश वृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

🕉 धार्मिक एवं वैदिक महत्व

मुहूर्त चिंतामणि एवं वृहत्संहिता के अनुसार पाणिग्रहण एवं मंगलसूत्र धारण के समय का लग्न नवदंपति के संपूर्ण जीवन को प्रभावित करता है।

✨ इस कार्य हेतु मुहूर्त विचार क्यों आवश्यक है?

विवाह का समय दोनों के संयुक्त भाग्य को निर्धारित करता है। शुभ नक्षत्र, तिथि और जामित्र आदि दोषों से रहित लग्न का चयन दांपत्य में सामंजस्य सुनिश्चित करता है।

📜 सामान्य शास्त्रोक्त नियम एवं वर्जित दोष

विवाह मुहूर्त में गुरु-शुक्र अस्त, रिक्ता तिथियां, जामित्र दोष एवं वेध का त्याग किया जाता है। व्यक्तिगत गणना में ताराबल व चंद्रबल जाँचा जाता है।

📋 मुहूर्त गणना हेतु आवश्यक विवरण

वर एवं वधू का नाम, विवाह स्थल, दिनांक सीमा, समय प्राथमिकता। व्यक्तिगत गणना हेतु दोनों की जन्म तिथि, समय व स्थान।

🎯 वैदिक मुहूर्त गणक Marriage relationships

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चयनित मांगलिक कार्य
💍 विवाह मुहूर्त (Vivaha Sanskar)
Rule Set: v1.2.0 (Classical Jyotish)

👤 आवेदक एवं व्यक्तिगत विवरण

💍 Bride & Groom Details (Optional for Basic; required for personalized Kundali & Tarabala matching)
👰 वधू विवरण (वैकल्पिक)
🤵 वर विवरण (वैकल्पिक)

📍 कार्यक्रम स्थल एवं नगर

Hyderabad, Telangana
17.3850° N, 78.4867° E (Asia/Kolkata)

📅 दिनांक सीमा एवं समय प्राथमिकता

❓ Clarifications & Guidelines

विवाह मुहूर्त (Vivaha Sanskar) Frequently Asked Questions

विवाह में गुरु और शुक्र अस्त का त्याग क्यों किया जाता है? +

गुरु सौभाग्य व ज्ञान तथा शुक्र दांपत्य सुख के कारक हैं। इनके अस्त रहने पर शुभ फल क्षीण हो जाते हैं।